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Low Carb Sugar-Free Sweets & Cakes

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Sugar free Sweets & Cakes

Sugar Free Kaju Katli (Stevia Sweetened) | Keto, Vegan & Diabetic Friendly Sweet | No Maltitol

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Vanilla & Chocolate Marble Sugar free Cake - Diabetic-Friendly, Keto, Gluten-Free (contains egg)

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Aarti Laxman (Founder)

Artinci is founded by Aarti Laxman, a certified Metabolic coach in the Low-Carb Nutrition & Metabolic Health domain from dLife.in, India’s only legally tenable course in this subject—recognized by the NSDC (under the Ministry of Skill Development & Entrepreneurship, Govt. of India). It’s also internationally accredited by the CPD Standards Office UK, with a global record of 144 CPD hours—the highest for any course of its kind. The accreditation is both nationally valid and globally recognised in over 50+ countries..

Recognition of artinci's journey

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100% Sugar-Free Desserts लगी Namita को Delicious

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प्रीडायबिटीज और फाइबर का रिश्ता प्रीडायबिटीज वह स्टेज है जब आपका ब्लड शुगर ऊपर चढ़ने लगता है, लेकिन अभी डायबिटीज बना नहीं है। इसी दौर में खाने में 25–30 ग्राम फाइबर रोज़ाना लाने से शुगर स्पाइक धीमे होते हैं, इंसुलिन रेजिस्टेंस कम होता है और डायबिटीज का रिस्क आधे से ज़्यादा तक घट सकता है। फाइबर “स्लो कार्ब” बनाता है – खाने के बाद शुगर धीरे‑धीरे बढ़ता है, न कि झट से, जिससे थकान, मूड स्विंग और क्रेविंग्स भी कम होती हैं। प्रीडायबिटीज के लिए टॉप हाई फाइबर फूड 1. दालें – मूंग, मसूर, चावला, राजमा दालें प्रोटीन + फाइबर का बेस्ट कॉम्बिनेशन हैं। मूंग और मसूर: आसान पचती हैं, शुगर स्पाइक धीमा करती हैं, और इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करने में मदद करती हैं। राजमा, चना, लोबिया: ज़्यादा फाइबर वाली दालें जो पेट भराव महसूस कराती हैं, और शाम तक भूख कम रहती है। आइडिया: रोटी‑भात के साथ दाल का भाग बढ़ाएँ। एक कटोरी दाल (उबली हुई) में लगभग 7–10 ग्राम फाइबर मिल सकता है। 2. मिलेट्स – बाजरा, रागी, ज्वार, राजगिरा ये इंडियन ग्रेन ग्लूटन फ्री होते हैं और फाइबर से भरपूर। बाजरा दलिया, रागी दलिया: नाश्ते में शामिल करने से बिना भारी हुए पेट भरा रहता है और दोपहर तक शुगर स्टेबल रहता है। ज्वार रोटी: चावल की जगह या भात को थोड़ा कम करके ज्वार रोटी शामिल करें। फायदा: इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स सफेद चावल और मैदा से काफी कम है। 3. पत्तेदार सब्जियाँ – मेथी, पालक, मूली गोभी, राजगीरा पत्ता पत्तेदार सब्जियों में सॉल्यूबल + इनसॉल्यूबल दोनों तरह के फाइबर रहते हैं। मेथी: शुगर कंट्रोल के लिए विशेष रूप से अच्छी, चाहें तो भात‑रोटी के साथ साग लें या रात को भिगोकर पानी बनाकर पी लें। पालक, चुकंदर की हरी पत्तियाँ: इन्हें सूप, दाल या साग के रूप में रोज़ शामिल करें। 4. फल – सेब, नाशपाती, जामुन, अमरूद (कम मात्रा में) फल फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट दोनों देते हैं, लेकिन प्रीडायबिटीज में मात्रा सीमित रखनी चाहिए। सेब और नाशपाती छिलके के साथ खाएँ – इससे फाइबर ज़्यादा मिलता है और शुगर स्पाइक कम रहता है। जामुन और अमरूद: इनमें कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स और अच्छा फाइबर होता है; दिन में एक छोटा फल तक सेफ माना जाता है। 5. बीज और छोटे फूड – चिया, अलसी, तिल, तूर दाल, चना चिया और अलसी: बीज के छोटे से बड़े पैकेज में फाइबर और ओमेगा‑3 दोनों होते हैं। स्मूदी, दही या ओट्स में मिला सकते हैं। चना (सूखे या भुने): फाइबर‑प्रोटीन का बेहतरीन लो‑कैलोरी स्नैक; रोज़ बिना तेल वाले भुने चने 1–2 चम्मच लें। इंडियन थाली में फाइबर कैसे बढ़ाएँ? नाश्ता: बाजरा या रागी दलिया + दही + चिया/अलसी का छिलका। दोपहर: दाल बढ़ाएँ (मूंग/मसूर) + भात कम करके ज्वार रोटी या ब्राउन राइस शामिल करें, साथ ही भरपूर पत्तेदार सब्जी। रात: रागी खिचड़ी या बाजरा खिचड़ी + दाल + लौकी/टिंडे की हरी सब्जी। स्नैक्स: भुने चने, ग्रीन टी + चना/मूंग का मिक्स, या फल छोटी क्वांटिटी में। प्रीडायबिटीज में लक्ष्य रोज़ 25–30 ग्राम फाइबर रखें, लेकिन धीरे‑धीरे बढ़ाएँ और उसके साथ पानी ज़्यादा पीते रहें, नहीं तो गैस या भारीपन लग सकता है। किसे सावधानी से लेना चाहिए? अगर आपको अक्सर गैस, अपच या आईबीएस जैसी समस्या है तो फाइबर बहुत तेज़ी से न बढ़ाएँ, धीरे‑धीरे हफ्ता‑दर‑हफ्ता बढ़ाएँ। गलत तरीके से बहुत ज़्यादा फाइबर लेने से खनिजों (ज़िन्क, आयरन) का अवशोषण भी प्रभावित हो सकता है, इसलिए बैलेंस ज़रूरी है। किसी भी बड़े डाइट बदलाव से पहले ग्लूकोमीटर चेक करके डॉक्टर या डाइटिशियन से ज़रूर सलाह लें।

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“प्रीडायबिटीज में शुगर को रोकने के लिए यह 1 बदलाव बस शुरू कर दें”

प्रीडायबिटीज क्या है, और ये “विंडो” क्यों है? प्रीडायबिटीज वह स्टेज है जब आपका ब्लड शुगर सामान्य से ऊपर होता है, लेकिन अभी डायबिटीज की रेंज में नहीं पहुँचा होता। इसे “चेतावनी चरण” कहते हैं, क्योंकि इसी दौर में जीवनशैली में बदलाव लाकर शुगर को लगभग पूरी तरह रोका जा सकता है। अगर इसे नज़रअंदाज़ किया जाए, तो ज्यादातर मरीज 5–10 साल में फुल‑फ्लेड्ज़ टाइप‑2 डायबिटीज में चले जाते हैं। वह “1 बदलाव” जो सबसे ज़्यादा काम करता है बहुत से लोग एक साथ डाइट बदलने, वजन कम करने और व्यायाम शुरू करने की कोशिश करते हैं, और जल्दी ही थक कर छोड़ देते हैं। रिसर्च दिखाती है कि जो सिंगल आदत सबसे ज़्यादा इंपैक्ट देती है, वह है:भोजन के तुरंत बाद 20–30 मिनट की हल्की वॉक या घर के अंदर ही लाइट एक्टिविटी। इससे अगले 2 घंटों में ब्लड शुगर स्पाइक 30–40% तक कम हो सकता है। मांसपेशियाँ ब्लूकोज को एनर्जी के तौर पर इस्तेमाल करती हैं, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस धीरे‑धीरे कम होता है। 12–24 हफ्तों में HbA1c में 0.5–1% तक सुधार देखा गया है, जो प्रीडायबिटिक मरीजों के लिए बड़ा बदलाव है। भारतीय थाली के साथ यह बदलाव कैसे करें? अपनी दिनचर्या में घुसा दें सुबह नाश्ता करने के बाद 10–15 मिनट घर के बाहर / बालकनी में चलें। दोपहर के भोजन के बाद काम या घर के काम के बहाने भी चलना शुरू करें (जैसे थोड़ा बागवानी, धोना‑पोंछना या छोटी दूरी की वॉक)। रात के खाने के बाद सिर्फ 10–15 मिनट चलने से भी अच्छा फायदा मिलता है। थोड़ी सी डाइट ट्वीक्स शाम के भोजन में 10–20% अधिक फाइबर जोड़ें: दाल, साबुत अनाज (बाजरा, रागी, ज्वार) और आधिक दाल वाला भात‑रोटी मिक्स। डिब्बाबंद शुगर‑ड्रिंक्स, आइस्क्रीम और ज़्यादा तेल वाले व्यंजन कम करें – ताकि वॉक का असर पूरी तरह दिख सके। यह बदलाव क्यों इतना ज़्यादा काम करता है? शुगर स्पाइक को तुरंत फ्लैट करता है: जब आप खाने के तुरंत बाद चलते हैं, तो आपकी मांसपेशियाँ ग्लूकोज को तेज़ी से उपयोग कर लेती हैं, जिससे ब्लड शुगर ऊपर ज़्यादा नहीं उठता। इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है: नियमित एक्टिविटी से शरीर की इंसुलिन जवाबदेही सुधरती है, जिससे लंबे समय में शुगर स्वाभाविक रूप से नीचे आता है। वजन और विज़्यूल फैट कम होता है: छोटी‑छोटी एक्टिविटी मिलकर दिन भर में कैलोरी घटाती हैं और पेट के आसपास का फैट (visceral fat) कम करती हैं, जो डायबिटीज और हार्ट रिस्क को भी घटाता है। ध्यान रखने वाली बातें अगर आपको हार्ट डिजीज, लगातार कमजोरी या घुटन, ब्लड प्रेशर बहुत उच्च है, तोवॉक शुरू करने से पहले डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें। शुरुआत में रफ्तार बहुत तेज़ न रखें –स्लो टू मीडियम पेस ठीक है, जब तक बात न करते हुए चलना मुश्किल न लगे। ग्लूकोमीटर या CGM वाले हों तो, खाने के बाद 30 मिनट बाद वॉक शुरू करने और बिना वॉक वाले दिन की रीडिंग्स नोट करें – फर्क खुद दिख जाएगा।

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ओजेम्पिक: डायबिटीज में हृदय रोग के जोखिम को कम कैसे करता है?

ओजेम्पिक क्या है और कैसे काम करता है? ओजेम्पिक एक GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट है जो इंसुलिन स्राव बढ़ाता है, ग्लूकागन दबाता है और भूख कम करता है—परिणामस्वरूप ब्लड शुगर स्थिर रहता है। SUSTAIN 6 ट्रायल में 3297 टाइप-2 डायबिटीज मरीजों पर 2 साल के अध्ययन से पता चला कि यह MACE (मेजर एडवर्स कार्डियोवस्कुलर इवेंट्स: हृदयाघात, स्ट्रोक, CV मौत) का जोखिम 26% घटाता है (HR 0.74)। FDA ने 2020 में इसे हृदय जोखिम कम करने के लिए अप्रूव किया। हृदय जोखिम कम करने के प्रमाण REACH अध्ययन (60,000 अमेरिकी मेडिकेयर मरीजों पर) में ओजेम्पिक ने डुलाग्लूटाइड की तुलना में MACE 23% और 5-पॉइंट MACE 25% कम किया, खासकर 66+ उम्र और बहु-रोग वाले मरीजों में। SUSTAIN 6 पोस्ट-हॉक एनालिसिस से सभी हाई-रिस्क ग्रुप्स में सुसंगत लाभ दिखा। भारतीय मरीजों के लिए, जहां डायबिटीज+हृदय रोग कॉमन है (100 मिलियन+ केस 2026 तक), यह जीवन रक्षक साबित हो सकता है। अध्ययन मरीज लाभ तुलना SUSTAIN 6 3297 (CV रोग वाले) MACE 26% कम प्लेसिबो  REACH 60,000+ (65+ उम्र) MACE 23% कम डुलाग्लूटाइड  भारतीय डायबिटीज मरीजों के लिए टिप्स ओजेम्पिक को मिलेट्स-दाल वाली डाइट (बाजरा खिचड़ी, मूंग दाल) और योग (भुजंगासन) के साथ लें—यह इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाकर हृदय लाभ दोगुना करता है। साइड इफेक्ट्स जैसे मतली को हल्दी-अदरक चाय से कम करें। डॉक्टर से HbA1c और ECG चेक कराएं; प्रेग्नेंसी या किडनी इश्यू में अवॉइड करें। सावधानियां और वैकल्पिक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइड्स कॉमन हैं, लेकिन 4-8 हफ्तों में कम हो जाते हैं। प्राकृतिक विकल्प जैसे मेथी-करेला जूस हृदय स्वास्थ्य सुधारते हैं, पर ओजेम्पिक जितना तेज नहीं। हमेशा डॉक्टर सलाह लें—यह लाइफस्टाइल चेंज की जगह नहीं लेता। 30 दिनों में ग्लूकोमीटर से ट्रैक करें। https://www.perplexity.ai/search/77e2bae7-0608-489d-8515-59e46d18cdbe https://www.pharmanow.live/latest-news/ozempic-heart-risk-reduction https://www.empr.com/home/news/ozempic-approved-to-reduce-risk-of-major-adverse-cardiovascular-events/

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दैनिक भोजन में प्रीबायोटिक फूड्स कैसे शामिल करें

प्रीबायोटिक फूड्स आंत के अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देते हैं, जो पाचन सुधारते हैं, इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और डायबिटीज में ब्लड शुगर स्थिर रखते हैं । भारतीय आहार में इन्हें आसानी से मिलाएं, जैसे दालें, अनाज और सब्जियां। प्रीबायोटिक्स क्या हैं ये अपचनीय फाइबर हैं जो कोलन में अच्छे बैक्टीरिया को खिलाते हैं, छोटे चेन फैटी एसिड बनाते हैं जो आंत की परत मजबूत करते हैं ।डायबिटीज वाले रोज 3-5 ग्राम लें ताकि इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़े और ब्लोटिंग कम हो ।भारतीय भोजन में लहसुन, प्याज, केला और दालें प्राकृतिक स्रोत हैं । नाश्ते में शामिल करें ओट्स या जई का दलिया: रातभर भिगोकर दही के साथ खाएं; बीटा-ग्लूकन अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाते हैं । केला स्मूदी: कच्चा केला ब्लेंड करें, जो इनुलिन से भरपूर है और ब्लड शुगर स्थिर रखता है । इडली या डोसा: उड़द दाल का प्रीबायोटिक फाइबर पाचन सुधारता है । दोपहर के भोजन में दाल-चावल या खिचड़ी: चना दाल, मूंग दाल या राजमा मिलाएं; GOS फाइबर आंत को पोषित करते हैं । सब्जी में लहसुन-प्याज: रोजाना करी में डालें, जो बिफीडोबैक्टीरिया बढ़ाते हैं । मिलेट रोटी: रागी या ज्वार की रोटी दाल के साथ; रेसिस्टेंट स्टार्च कम ग्लाइसेमिक है । रात के भोजन और स्नैक्स में सलाद में चने या मटर: उबले काबुली चने या हरी मटर; प्रोटीन के साथ प्रीबायोटिक्स । सेब या सेब का छिलका: भोजन के बाद खाएं, पेक्टिन आंत साफ करता है । बार्ली खिचड़ी: जौ का उपयोग सूजन कम करने के लिए । डायबिटीज टिप्स धीरे-धीरे शुरू करें ताकि गैस न हो; 25-30 ग्राम फाइबर रोज लक्ष्य रखें ।दही या छाछ के साथ मिलाकर सिन्बायोटिक प्रभाव लें, जो इंसुलिन रेस्पॉन्स बेहतर करता है ।पानी ज्यादा पिएं और व्यायाम जोड़ें। https://www.webmd.com/diet/foods-high-in-prebiotic https://www.manipalhospitals.com/sarjapurroad/blog/prebiotic-and-probiotic-foods-to-support-healthy-gut/ https://andersonhousefoods.com/blog/top-prebiotic-foods-beans-legumes-gut-health-benefits/ https://www.healthline.com/nutrition/19-best-prebiotic-foods

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